अंगूर खट्टे हैं

purple grapes

एक लोमड़ी एक बाग में से गुजर रही थी। वहाँ उसने अंगूर के गुच्छों से भरा एक लत देखा। अंगूर देखकर उसके मुँह में पानी आ गया। वह उसे खाने के लिए लपकी पर उसे नहीं पा सकी। वास्तव में अंगूर काफ़ी ऊँचाई पर थे और उसके पहुँच से दूर थे। अतः वह ज़ोर ज़ोर से कूदकर उस तक पहुँचने की कोशिश करने लगी। परंतु उसका हर प्रयास विफल रहा। अंततः लोमड़ी थक गयी और उसने अंगूर खाने का अपना विचार त्याग दिया। फिर वह वहाँ से चल पड़ी। लेकिन चलते चलते उसके दिमाग़ में अंगूरों के प्रति कड़वाहट दौड़ रही थी। वह अपने आप से कह रही थी कि जिस अंगूर को उसने पके हुए मीठे अंगूर समझ रखा था वह तो बिल्कुल खट्टे निकले।